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भारत में टॉप 10 सबसे अधिक डिविडेंड देने वाले स्टॉक

जब कोई कंपनी अच्छा Profit कमाती है, तो वह अक्सर अपने उस मुनाफे का एक हिस्सा Shareholders के साथ बाँटती है। इसे ही dividend कहा जाता है। आसान भाषा में कहें तो अगर किसी Investors ने कंपनी के शेयर खरीदे हैं, तो कंपनी समय-समय पर उन्हें उनके Investment पर Cash या कभी-कभी Additional Shares के रूप में Dividend देती है।
इस तरह के Stocks Investors के लिए एक तरह का Passive Income Source बन जाते हैं और समय के साथ wealth creation में भी मदद करते हैं। ऐसे स्टॉक्स में निवेश करते समय केवल Dividend ही नहीं, बल्कि कंपनी की Financial Stability और Performance को भी ध्यान में रखना ज़रूरी होता है।
डिविडेंड यील्ड क्या होता है?
डिविडेंड यील्ड एक ऐसा अनुपात (Ratio) होता है जो यह दिखाता है कि किसी शेयर की मौजूदा कीमत (current share price) के मुकाबले कंपनी अपने निवेशकों को कितना रिटर्न (as dividend) दे रही है। इसे हम एक तरह से percentage return के रूप में समझ सकते हैं।
डिविडेंड यील्ड निकालने का फॉर्मूला होता है:
डिविडेंड यील्ड = (प्रति शेयर डिविडेंड ÷ वर्तमान शेयर मूल्य) × 100
उदाहरण : अगर किसी कंपनी का शेयर ₹200 में मिल रहा है और वह हर साल ₹10 का dividend देती है ।
डिविडेंड यील्ड= (10 ÷ 200) × 100 = 5%
इसका मतलब है कि कंपनी ₹200 के शेयर पर हर साल ₹10 यानी 5% का रिटर्न Dividend के रूप में दे रही है।
नोट: Dividend कैलकुलेटर – ऑनलाइन प्रति शेयर Dividend की गणना करें
डिविडेंड के प्रकार
- Dividend कई तरह के हो सकते हैं। हर कंपनी अपनी Earnings और Policy के हिसाब से अलग-अलग type का dividend देती है। एक investor के लिए यह जानना ज़रूरी है कि कौन-सा Dividend क्या होता है और कैसे काम करता है।
- Cash Dividend यह सबसे common type होता है, जिसमें company सीधे shareholders के bank account में cash transfer करती है। ज़्यादातर listed companies इसी format को follow करती हैं।
- Stock Dividend: इस case में company cash देने की बजाय अपने ही additional shares issue करती है। इससे shareholders की total shareholding बढ़ जाती है, लेकिन कंपनी का cash balance unaffected रहता है।
- Interim Dividend: यह dividend financial year के पूरा होने से पहले declare किया जाता है। यह दर्शाता है कि company ने उस specific period में अच्छा performance किया है और वो profit का एक हिस्सा early distribute कर रही है।
- Final Dividend: Year-end के बाद, जब company की full-year financials finalize हो जाती हैं, तब Final Dividend declare किया जाता है। इसे Annual General Meeting (AGM) में board और shareholders की approval के बाद distribute किया जाता है।
- Special Dividend: जब किसी company को एक-time exceptional profit होता है जैसे किसी asset की बिक्री या बड़ी deal से तब वो एक बार का Special Dividend declare कर सकती है। यह regular नहीं होता और specific situations में ही दिया जाता है।
Top 10 सबसे ज़्यादा Dividend देने वाले Stocks
इस लिस्ट में शामिल ज्यादातर कंपनियों का मार्केट कैप ₹1 लाख करोड़ से ज़्यादा है और ये फाइनेंशियली मज़बूत स्थिति में हैं।
| कंपनी का नाम | Div. Yield | शेयर मूल्य | Market Capitalization (₹ करोड़ में) |
|---|---|---|---|
| वेदांता लिमिटेड | 9.76 % | ₹ 446 | 1,74,423 |
| चेन्नई पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड | 8.48 % | ₹ 646 | 9,627 |
| इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड | 8.28 % | ₹ 145 | 2,04,476 |
| कोल इंडिया लिमिटेड | 6.34 % | ₹ 402 | 2,47,526 |
| भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड | 6.70 % | ₹ 316 | 1,36,902 |
| हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड | 5.27 % | ₹ 400 | 85,166 |
| गुजरात पिपावाव पोर्ट लिमिटेड | 5.02 % | ₹ 145 | 6,988 |
| ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन लिमिटेड | 4.97 % | ₹ 245 | 3,08,091 |
| कैस्ट्रोल इंडिया लिमिटेड | 4.08 % | ₹ 208 | 20,584 |
| ग्रेट ईस्टर्न शिपिंग कंपनी लिमिटेड | 3.26 % | ₹ 914 | 13,045 |
अधिक जानें – पेनी स्टॉक्स क्या हैं? निवेश के लाभ, जोखिम, और सर्वश्रेष्ठ स्टॉक सूची
1. वेदांता लिमिटेड
वेदांता लिमिटेड की स्थापना 1979 में हुई थी और इसका मुख्यालय मुंबई में स्थित है। यह एक विविधीकृत प्राकृतिक संसाधन कंपनी है, जो जिंक, सीसा, चांदी, तेल और गैस, लौह अयस्क, स्टील और एल्युमिनियम में संलग्न है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में, वेदांता ने ₹1,52,968 करोड़ की अब तक की सबसे अधिक समेकित राजस्व दर्ज की, जो पिछले वर्ष की तुलना में 10% अधिक है। कंपनी का EBIT ₹36,790 करोड़ रहा, जो 23% की वार्षिक वृद्धि को दर्शाता है। शुद्ध लाभ ₹20,534 करोड़ रहा, जिसमें 172% की वृद्धि हुई।
2. चेन्नई पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड
Chennai Petroleum Corporation Ltd (CPCL) की स्थापना 1965 में हुई थी और इसका मुख्यालय चेन्नई, तमिलनाडु में स्थित है। यह कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन की सहायक कंपनी है और दो प्रमुख रिफाइनरियों का संचालन करती है: मैनाली रिफाइनरी (10.5 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष) और नागपट्टिनम रिफाइनरी (1 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष)। मार्च 2025 को समाप्त तिमाही में, CPCL ने ₹17,249.12 करोड़ की शुद्ध बिक्री दर्ज की, जो पिछले वर्ष की तुलना में 2.66% कम है।
3. इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOC) की स्थापना 1959 में हुई थी और इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है। यह भारत की सबसे बड़ी राज्य-स्वामित्व वाली तेल और गैस कंपनी है, जो रिफाइनिंग, पाइपलाइन ट्रांसपोर्टेशन और पेट्रोलियम उत्पादों के विपणन में संलग्न है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में, IOC ने ₹12,028 करोड़ का समेकित शुद्ध लाभ दर्ज किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 71% कम है। कंपनी की समेकित संचालन से आय ₹7,61,621 करोड़ रही, जो पिछले वर्ष की तुलना में 2.4% कम है।
4. कोल इंडिया लिमिटेड
कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) की स्थापना 1975 में हुई थी और इसका मुख्यालय कोलकाता, पश्चिम बंगाल में स्थित है। यह दुनिया की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी है और भारत की कुल कोयला उत्पादन का लगभग 82% योगदान देती है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में, CIL ने ₹34,839 करोड़ का शुद्ध लाभ दर्ज किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 5.70% कम है।
5. भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड
भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) की स्थापना 1976 में हुई थी और इसका मुख्यालय मुंबई में स्थित है। यह भारत की दूसरी सबसे बड़ी राज्य-स्वामित्व वाली तेल रिफाइनिंग और विपणन कंपनी है। मार्च 2025 को समाप्त तिमाही में, BPCL का समेकित शुद्ध लाभ ₹4,034 करोड़ रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 20% कम है। कंपनी की संचालन से आय ₹1.11 लाख करोड़ रही, जो 4.6% की गिरावट को दर्शाती है।
6. हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड
हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) की स्थापना 1952 में हुई थी और इसका मुख्यालय मुंबई में स्थित है। यह भारत की तीसरी सबसे बड़ी तेल विपणन कंपनी है, जो मुंबई और विशाखापत्तनम में दो प्रमुख रिफाइनरियों का संचालन करती है। मार्च 2025 को समाप्त तिमाही में, HPCL की शुद्ध बिक्री ₹1,10,206 करोड़ रही, जो पिछले वर्ष की तुलना में 4.3% कम है।
7. गुजरात पिपावाव पोर्ट लिमिटेड
गुजरात पिपावाव पोर्ट लिमिटेड (GPPL) की स्थापना 1992 में हुई थी और यह गुजरात में स्थित पिपावाव पोर्ट का संचालन करती है। यह भारत का पहला निजी क्षेत्र का बंदरगाह है, जो कंटेनर, बल्क और लिक्विड कार्गो को संभालता है। दिसंबर 2024 को समाप्त तिमाही में, GPPL की समेकित शुद्ध बिक्री ₹262.89 करोड़ रही, जो पिछले वर्ष की तुलना में 2.5% कम है।
8. ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन लिमिटेड
ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (ONGC) की स्थापना 1956 में हुई थी और इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है। यह भारत की सबसे बड़ी सरकारी तेल और गैस अन्वेषण और उत्पादन कंपनी है, जो देश की लगभग 70% कच्चे तेल और 84% प्राकृतिक गैस का उत्पादन करती है। दिसंबर 2024 को समाप्त तिमाही में, ONGC की समेकित शुद्ध बिक्री ₹1,66,096 करोड़ रही, जो पिछले वर्ष की तुलना में 0.32% अधिक है।
9. कैस्ट्रोल इंडिया लिमिटेड
कैस्ट्रोल इंडिया लिमिटेड की स्थापना 1910 में हुई थी और इसका मुख्यालय मुंबई में स्थित है। यह कंपनी ऑटोमोटिव और इंडस्ट्रियल लुब्रिकेंट्स के निर्माण में अग्रणी है और BP की सहायक कंपनी है। वित्तीय वर्ष 2024 में, कैस्ट्रोल इंडिया ने ₹5,453 करोड़ की कुल संचालन से आय दर्ज की, जो पिछले वर्ष की तुलना में 5.7% अधिक है। कंपनी का शुद्ध लाभ ₹927 करोड़ रहा, जिसमें 7% की वृद्धि हुई। कंपनी ने पिछले एक साल में ₹13 प्रति शेयर का कुल लाभांश घोषित किया, जिसमें ₹4.5 का विशेष लाभांश शामिल है।
10. ग्रेट ईस्टर्न शिपिंग कंपनी लिमिटेड
ग्रेट ईस्टर्न शिपिंग कंपनी लिमिटेड की स्थापना 1948 में हुई थी और इसका मुख्यालय मुंबई में स्थित है। यह भारत की सबसे बड़ी निजी क्षेत्र की शिपिंग कंपनी है, जो कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों, गैस और ड्राई बल्क कमोडिटीज के लिए शिपिंग सेवाएं प्रदान करती है। मार्च 2025 को समाप्त तिमाही में, कंपनी की समेकित शुद्ध बिक्री ₹1,373 करोड़ रही, जो पिछले वर्ष की तुलना में 20% कम है।
Key Performance Indicators
किसी भी कंपनी की परफॉर्मेंस को समझने के लिए कुछ अहम Key Performance Indicators (KPI) होते हैं। ये indicators निवेशकों को यह समझने में मदद करते हैं कि कंपनी का व्यवसाय कितना मजबूत है और उसका रिटर्न कितना स्थिर रह सकता है।
| Stock Name | Operating Profit Margin (%) | Net Profit Margin (%) | ROCE (%) | Current Ratio (x) | Debt to Equity Ratio (x) |
|---|---|---|---|---|---|
| Vedanta Ltd | 22.82 | 13.42 | 26.92 | 0.70 | 1.79 |
| Chennai Petroleum Corporation Ltd | 0.73 | 0.26 | 4.57 | 1.17 | 0.38 |
| Indian Oil Corporation Ltd | 2.99 | 1.58 | 8.22 | 0.68 | 0.76 |
| Coal India Ltd | 33.05 | 24.30 | 24.24 | 1.49 | 0.09 |
| Bharat Petroleum Corporation Ltd | 4.73 | 2.72 | 16.30 | 0.80 | 0.63 |
| Hindustan Petroleum Corp Ltd | 2.87 | 1.57 | 12.67 | 0.60 | 1.30 |
| Gujarat Pipavav Port Ltd | 53.85 | 33.64 | 20.75 | 3.04 | 0 |
| Oil & Natural Gas Corpn Ltd | 14.59 | 9.24 | 15.43 | 0.88 | 0.36 |
| Castrol India Ltd | 23.61 | 17.28 | 53.57 | 2.02 | 0 |
| Great Eastern Shipping Company Ltd | 50.69 | 44.04 | 16.60 | 6.46 | 0.15 |
High Dividend Stocks में Invest करने से पहले किन बातों का ध्यान रखें?
ऐसे शेयर जो ज़्यादा dividend देते हैं, अक्सर निवेशकों को आकर्षित करते हैं। लेकिन केवल डिविडेंड यील्ड देखकर स्टॉक चुनना हमेशा सही फैसला नहीं होता। निवेश से पहले कुछ ज़रूरी बातों को समझना बहुत जरूरी होता है।
1. डिविडेंड यील्ड देखकर स्टॉक न चुनें
कई बार कंपनियां अधिक dividend देकर investors को attract करने की कोशिश करती हैं , लेकिन उसका असली बिज़नेस कमजोर हो सकता है। अगर कंपनी का बिज़नेस strong नहीं है, तो वह future में dividend देना बंद भी कर सकती है। इसलिए किसी भी शेयर में निवेश करने से पहले उसके fundamentals जैसे – उसका मुनाफा (profit), कमाई (revenue), और कर्ज़ (debt) को ज़रूर देखें।
2. डिविडेंड Payout Ratio को समझें show
Dividend payout ratio यह show करता है कि कंपनी अपने कुल Profits का कितना हिस्सा dividend के रूप में दे रही है। यदि कोई कंपनी अपनी पूरी या अधिकांश earnings dividend में खर्च कर रही है, तो इसका मतलब हो सकता है कि वह Future Growth में कम Invest कर रही है। कभी-कभी High Dividend Payout Ratio कंपनी के लिए Risky भी हो सकता है ।
3. Earning Stability और Cash Flow की जांच करें
Dividend sustainability को समझने के लिए कंपनी की Earning Stability और Free cash flow की स्थिति को भी परखना ज़रूरी है। क्या कंपनी हर साल consistent तरीके से लाभ अर्जित कर रही है? क्या उसके पास future में भी dividend देने की क्षमता है? ये सवाल long-term निवेशकों के लिए अहम हैं।
4. Dividend पर लगने वाला टैक्स (TDS)
Dividend पर कुछ प्रतिशत Tax पहले से ही कट जाता है जिसे TDS (Tax Deducted at Source) कहते हैं। इसलिए जो Amount आपको मिलता है, वो Declared Amount से कम हो सकता है। Invest करते समय इस बात को ध्यान में रखना चाहिए।
5. किन सेक्टर में dividend stocks ज़्यादा भरोसेमंद होते हैं
कुछ सेक्टर जैसे PSU (Public Sector Undertaking), Energy, और FMCG में काम करने वाली कंपनियाँ आमतौर पर Regular Dividend देती हैं। इनका Cash Flow Stable होता है और Performance भी consistent होती है। ऐसे सेक्टर्स को ज्यादा सुरक्षित माना जाता है, लेकिन फिर भी हर कंपनी का Individual Performance देखना जरूरी होता है।
निष्कर्ष
भारत में कई ऐसी कंपनियाँ हैं जो लगातार Dividend देती हैं और जिनका डिविडेंड यील्ड काफ़ी मजबूत होता है। ये कंपनियाँ आमतौर पर Mature बिज़नेस मॉडल और Stable Earnings वाली होती हैं, जो Regular Cash Flow जनरेट करती हैं। ऐसे Stocks उन Investors के लिए ज़्यादा उपयुक्त माने जाते हैं जो Consistent Returns की तलाश में रहते हैं। डिविडेंड यील्ड एक महत्वपूर्ण Indicator होता है, लेकिन इसके साथ-साथ कंपनी की Financial Health, Earning Consistency और Long-Term Performance को भी समझना जरूरी होता है। हर Stock का अपना Risk Level और Sector-Specific Background होता है, जो yield को प्रभावित कर सकता है।
Disclaimer
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